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ऐलीअन बनता मानव

 
ऐलीअन
ऐलीअन 
ऐलीअन (Alien) से तात्पर्य बाह्य अंतरिक्ष से आया प्राणी से है । हमारी कल्पना ने उसे कई  रूप रंग दिए हैं, परंतु उसके अस्तित्व पर विभिन्न पक्षों के अपने-अपने तर्क है । कुछ उनके अस्तित्व को बिल्कुल नाकारते हैं , वहीं दूसरी और कुछ लोग उन्हें देखने का दावा करते हैं । पता नहीं सच्चाई क्या है, परंतु हमारा विषय इस से हटकर है।  

मेरा यह लेख एक ऐसे विषय के बारे मे आप का ध्यान आकर्षित कराता है, जो हमारे बीच बहुत से बाह्य प्राणियों का स्वरूप साकार कर रहा है । चलिए जानते है उस बारे मे - 

आज के डिजिटल युग मे मनुष्य का स्वरूप कुछ इस तरह बदल रहा है, मानो प्रतीत होता है जैसे ऐलीअन हमारे बीच मे घूम रहे है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, मोबाईल धारक बड़े-बड़े हेड्फोन के साथ। मोबाईल के साथ बड़े-बड़े हेड्फोन पहने लोग ऐसे प्रतीत होते है जैसे कि ऐलीअन हमारे बीच ही घूम रहे हों। वास्तव मे देखा जाए तो यह बहुत हद तक ठीक भी है। आजकल अधिकतर  लोगों अपने मोबाईल मे ही व्यस्त रहते हैं । उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता आस-पास क्या हो रहा है, सभी लोगों अपने -अपने यंत्रों मे व्यस्त नजर आते हैं । 

आधुनिक मानव
आधुनिक मानव 
सिविक सेन्स (Civic Sense) की तो बात ही क्या, लोग पब्लिक प्लेस पर अपने मोबाईल यंत्र मे तेज आवाज मे म्यूजिक सुनते नजर आएंगे । म्यूजिक सुनना कोई गलत बात नहीं है परंतु हेड्सेट ओर ईर्फोन पहने सड़कों पर  बेखोफ चलना , मेट्रो मे अपने फोन पर लाउड म्यूजिक सुनना और  अपने यंत्र मे खोया रहना ही ऐसा प्रतीत कराता है कि  हम किसी ऐलीअन गृह पर रह रहे हैं। 

सुरक्षा  सूट पहने मानव
सुरक्षा सूट पहने मानव 
ऐसा ही एक रूप का साक्षात्कार कोरोना काल मे हुआ था , जो वास्तव में  एक ऐलीअन का रूप ही प्रतीत होता था। सफेद रंग के सूट पहने  पूरी तरह मास्क से कवर हाथ मे विभिन्न प्रकार के यंत्र लिए मानव किसी ऐलीअन से कम प्रतीत नहीं होता था। वो समय माना कि एक बीमारी का काल था, परंतु मानव का ऐसा स्वरूप देखकर प्रतीत होता था कि वास्तव मे आकाश गंगा से मानो ऐलीअनो ने पृथ्वी पर हमला कर दिया और लोगों को पकड़-पकड़कर कही ले जाना शुरू कर दिया है  वास्तव मे वो 
दृश्य बहुत ही भयावह और विचिलित करने वाला था । 

परंतु आज इस डिजिटल रूप मे मानव मोबाईल फोन हाथ मे लिए, कानों मे ईर्फोन या हेड्फोन लगाए और आँखों पर डिजिटल चश्मे पहने किसी ऐलीअन से कम नहीं प्रतीत होता। साथ ही उसका व्यवहार भी कुछ हद तक ऐसा ही होता जा रहा है, उसे अपने मोबाईल यंत्र के अलावा किसी और चीज के प्रति कोई  खास लगाव नहीं है । 

एक घर पर लगभग सभी के पास मोबाईल है और सभी इस डिजिटल वर्ल्ड मे अपने-अपने कार्य मे व्यस्त है , कोई रील देख रहा है , कोई संगीत सुन रहा है , कोई गेम खेल रहा है आदि।  किसी के पास किसी अपने के लिए वक्त नहीं है । मोबाईल जागने से सोने तक साये के साथ हम से चिपक कर  रहता है । 

कम्यूनिकेशन का इतना अच्छा जरिया होते हुए भी हम आपस मे  कम्यूनिकेशन नहीं कर पाते क्योंकि हम सब व्यस्त है बस अपनी ही दुनिया में । 

मोबाईल मनुष्य द्वारा निर्मित एक बहुत ही अच्छा उपकरण है, परंतु इसका इस्तेमाल और निर्भरता हमें ऐलीअन बना रही है ,स्वभाव और शरीर दोनों से। किसी भी चीज का अत्याधिक इस्तेमाल आप को किसी न किसी तरह की परेशानी मे डाल सकता है - चाहे वो शरारिक हो या फिर मानसिक । 

इस आलेख का उद्देश्य मात्र उस पढ़ी-लिखी जनता को जागरुक करना है जो मोबाईल का अत्यधिक इस्तेमाल करती है, जो उन्हे अपने घर,परिवार , यार-दोस्तों  और समाज के बीच एक ऐलीअन बना रहा है ।  

ऐलीअन मतलब विचित्र व अनजान; सर्वथा अपरिचित 

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