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गालियाँ या अपशब्द

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गाली किसी भाषा की बोली मे प्रयुक्त, क्रोध वश उचारित कुछ विशेष शब्द है, जो झगड़े के आरंभ मे दो बुद्धि जीव, एक दूसरे के साथ साझा करते है।  यह कुछ अटपटे-बेढंगे और त्वरित उत्पन्न शब्द भी हो सकते है,  इनका किसी झगड़े और विवाद मे मूल स्थान होता है।  क्रोध को व्यक्त करने का एक बहुत ही सरल और सहज साधन है-गाली,  गाली-जो कभी-कभी लहू-लुहान कर देती है आपके चरित्र और मन को, कौन है ऐसे शब्दों का रचीयता, जो बिना हथियार ही घायल कर देता है, तन और मन को।  जिसका श्रवण मात्र ही भर देता है,  मन को भीषण क्रोध और आत्मग्लानि से , भड़का देती है प्रतिशोध की ज्वाला मन मे और उच्चारित होती है गालियाँ प्रतियुतर मे ।  गाली जो एक सरल और सीधे मानव को भी भर लेती है अपने आगोश मे, और वह भी शुरू कर देता है उन अटपटे-बेढंगे और त्वरित उत्पन्न शब्द का सैलाब ।  कभी-कभी भयंकर परिणाम का कारण भी बन जाती हैं ये गालियां, जब की कही-कही सरल सीधे स्वभाव से, दैनिक जीवन का हिस्सा है गालियां ।  अक्सर गाली का प्रयोग अपमानजनक, निन्दात्मक या कठोर भाषा के रूप में ही होता है। अंग्रेजी  में इसे "sw...

गधा एक उपेक्षित प्राणी

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 गधा एक ऐसा पालतू जानवर जो इंसानों के साथ हजारों वर्षों से जुड़ा हुआ है। नर गधे को जैक कहा जाता जबकी मादा गधे को जेनेट या जेनी कहा जाता है, और उनके बच्चे को कोल्ट कहते हैं।  एक जानवर जो पर्याय है मूर्खता का, जो मनुष्यों मे प्रचलित है एक अपशब्द अतार्थ गाली के रूप मे। “अबे गधा है क्या” बोलचाल की भाषा में, "गधा" शब्द का प्रयोग मूर्ख, बेवकूफ या जिद्दी व्यक्ति के लिए किया जाता है, और अक्सर इसे "बेवकूफ" के पर्यायवाची के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका प्रयोग अक्सर किसी ऐसे व्यक्ति का वर्णन करने के लिए किया जाता है जो मूर्खतापूर्ण या तर्कहीन तरीके से व्यवहार करता है। "गधे को बाप बनाना" मुहावरे का अर्थ है ज़रूरत पड़ने पर किसी मूर्ख या नीच व्यक्ति की भी खुशामद करना, चापलूसी करना, या झूठी तारीफ करना ताकि अपना काम निकल सके। यह मुहावरा भी गधे को उसके अड़ियल स्वभाव की वजह से ही मूर्ख प्राणी की श्रेणी मे गिनता है। सरल-सहज, मेहनती पर थोड़ा अड़ियल होना, क्या मूर्खता की निशानी है? यह एक सोचने का विषय है ।  गधा वास्तव मे क्या एक मूर्ख और ढीठ जानवर है? नहीं- गधा जैसा सोचा जा...

ऐलीअन बनता मानव

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  ऐलीअन  ऐलीअन (Alien) से तात्पर्य बाह्य अंतरिक्ष से आया प्राणी से है । हमारी कल्पना ने उसे कई  रूप रंग दिए हैं, परंतु उसके अस्तित्व पर विभिन्न पक्षों के अपने-अपने तर्क है । कुछ उनके अस्तित्व को बिल्कुल नाकारते हैं , वहीं दूसरी और कुछ लोग उन्हें देखने का दावा करते हैं । पता नहीं सच्चाई क्या है, परंतु हमारा विषय इस से हटकर है।   मेरा यह लेख एक ऐसे विषय के बारे मे आप का ध्यान आकर्षित कराता है, जो हमारे बीच बहुत से  बाह्य प्राणियों का स्वरूप साकार कर रहा है । चलिए जानते है उस बारे मे -  आज के डिजिटल युग मे मनुष्य का स्वरूप कुछ इस तरह बदल रहा है, मानो प्रतीत होता है जैसे ऐलीअन हमारे बीच मे घूम रहे है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, मोबाईल धारक बड़े-बड़े हेड्फोन के साथ। मोबाईल के साथ बड़े-बड़े हेड्फोन पहने लोग ऐसे प्रतीत होते है जैसे कि ऐलीअन हमारे बीच ही घूम रहे हों। वास्तव मे देखा जाए तो यह बहुत हद तक ठीक भी है। आजकल अधिकतर  लोगों अपने मोबाईल मे ही व्यस्त रहते हैं । उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता आस-पास क्या हो रहा है, सभी लोगों अपने -अपने यंत्रों मे व्यस्त न...

रंग भरने वाली किताबों के विकासात्मक लाभों की जानकारी

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 रंग भरने वाली किताबों के विकासात्मक लाभों की जानकारी तेजी  से डिजिटल (Digital) होती दुनिया में, किताब में रंग भरने का सरल कार्य बच्चों के लिए विकासात्मक लाभों का खजाना प्रदान करता है। नन्हें  हाथों को व्यस्त रखने  के लिए सिर्फ एक शगल (Pass time) होने से कहीं ज़्यादा, रंग भरना एक शक्तिशाली उपकरण है, जो आवश्यक संज्ञात्मक, मोटर और भावनात्मक कौशल का पोषण करता है।  बढ़िया  मोटर नियंत्रण (मोटर कौशल शारीरिक क्षमताएं हैं जिनमें विशिष्ट गतिविधियों या कार्यों को करने के लिए मांसपेशियों का उपयोग करना शामिल है। ये चलने और बैठने जैसी बुनियादी क्रियाओं से लेकर लिखने या खेल खेलने जैसी अधिक जटिल गतिविधियों तक हो सकती हैं।)  को बढ़ाने से लेकर रचनात्मकता को बढ़ावा देने और भावनाओं के लिए एक स्वस्थ तरीका है। यह केवल एक कार्यविधि ही नहीं अपितु बच्चों, के सम्पूर्ण विकास की कुंजी है। चलिये जानते है -इसके कुछ और लाभ ।  आवश्यक कौशल को निखारना  मोटर कौशल का विकास  रंग भरने का सबसे महत्वपूर्ण लाभ ठीक मोटर कौशल के विकास में निहित है। क्रेयॉन (Crayon), पेंसिल (Pencil)...

मेरी प्यारी गुल्लक

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गुल्लक जो प्रतीक है धन संचय का, जो सिखाता है कैसे छोटे-छोटे प्रयास बड़ी खुशियों को जन्म देते है। मिट्टी से बना ऐसा पात्र जो हमे जीवन के कुछ अनोखे पाठ पढ़ाता है। कुम्हार के द्वारा चाक पर चढ़कर आग मे तपकर तैयार होता है यह अनोखा पात्र, जिसे आज विभिन्न प्रकार के आकार और रंगों से सजाकर तैयार किया जाता है। गुल्लक एक ऐसा बैंक जिसमे आप एक छिद्र के माध्यम से रुपए- पैसे तो जमा कर सकते है परंतु समय से पहले बिना तोड़े निकल नहीं सकते। परंतु कभी-कभी उत्सुकता वश कुछ प्रयास किया जाता था, गुल्लक को बिना तोड़कर उस जमा को निकालने का । परंतु अपने बड़ों द्वारा समझाने पर हम छोड़ देते थे उस जिद्द को । तो यह है, गुल्लक की कहानी ।  बचपन मे दीपावली के त्योहार पर उपहार के रूप मे दिलाया जाने वाला खिलौना है गुल्लक। खिलौने से अभिप्राय यह है कि किस तरह बच्चों को खेल-खेल मे धन संचय और धन की उपयोगिता का पाठ घर-घर मे सिखाया जाता है।  गुल्लक का प्रचलन केवल भारत मे ही नहीं अपितु अन्य देशों मे भी है –जहां इसे पिगी बैंक (Piggy Bank)  कहा जाता है।  जर्मनी और नीदरलैंड जैसे कुछ यूरोपीय देशों में, सुअर अच्छे भाग्य ...

कछुआ और दो सारस की कहानी और संदेश

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आज की  कहानी के शीर्षक से आपको ज्ञात हो गया होगा कि यह कहानी बचपन मे पढ़ी वही कहानी है , जो कि हम सभी ने कितनी बार पढ़ी और अपने बच्चों को सुनाई होगी। कहानी मे तीन जीवों को पात्रता दी गई है जो कहानी के संदेश को बहुत ही सफलता के साथ पढ़ने व सुनने वाले तक पहुँचाते है। तो चलिए बिना ज्यादा देर किए कहानी को शुरू करते हैं। एक समय एक छोटे से तालाब में एक कछुआ रहता था।   एक बार भयंकर गर्मी के कारण धीरे-धीरे तालाब का पानी सूखने लगा । कछुआ इस बात से परेशान रहता कि यदि तालाब पूरी तरह सूख गया तो मेरा क्या होगा। एक दिन , दो सारस तालाब के पास आए और कछुए ने उन दोनों सारस से उसे पास के तालाब में ले जाने के लिए कहा , जहां अधिक पानी है। सारस में से एक ने बताया , “ हम एक तालाब को जानते हैं जहाँ बहुत सारा पानी है। लेकिन , हम तुम्हें वहां कैसे ले जा सकते हैं”।   कछुए  ने उनसे कहा, “चिंता मत करो, मेरे पास एक युक्ति है। तुम दोनों अपनी चोंच में एक छड़ी पकड़ो और मैं उसे अपने मुँह से पकड़ूंगा। तब तुम दोनों उड़कर मुझे उस तालाब तक ले जा सकते हो।” सीख मुसीबत मे हमे अपनी सूझ-बूझ से काम लेना...