एक पत्र की आत्मकथा
मै पत्र हूँ – पहचाना क्या ? पोस्टकार्ड आज मैं विलुप्त होने की कगार पर हूँ ? कभी मेरी प्रसिद्धि होती थी, चहो ओर विचारों और संदेशों को पहुँचाने का माध्यम था- मैं । मैं कई नामों से जाना जाता हूँ– जैसे चिट्ठी, पत्री, खत और पोस्टकार्ड आदि । वैसे तो मैं आज भी प्रचलित हूँ, परंतु आज के डिजिटल युग मे एसएमएस (SMS), चैट और ई-मेल ने मेरी जगह ले ली है । जहां आज मेरे डिजिटल बंधु प्रसिद्धि मे है, कभी मैं भी हुआ करता था? स्याही से लिखे संदेशों से अभिभूत, मैं अपना सफर एक शहर से एक गाँव, एक गाँव से एक कस्बे और दूर-दराज के इलाकों तक डाक व्यवस्था के लाल और काले रंग के डिब्बों के जरिए पोस्टमैन की मदद से तय करता था। समय के साथ मेरे रूप मे भी कई परिवर्तन हुए। मैं अपने नए रूप मे ओर भी सुदृढ़ हुआ। वैसे तो मैं संचार का सुगम साधन हूँ और विशेषतः दो प्रकार का होता हूँ -जैसे औपचारिक पत्र और अनौपचारिक पत्र । औपचारिक पत्र जो काम-काज की दुनिया मे इस्तेमाल होते है और अनौपचारिक पत्र जिन्हे आप व्यक्तिगत रूप से इस्तेमाल कर सकते हैं । भारत ...