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गधा एक उपेक्षित प्राणी

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 गधा एक ऐसा पालतू जानवर जो इंसानों के साथ हजारों वर्षों से जुड़ा हुआ है। नर गधे को जैक कहा जाता जबकी मादा गधे को जेनेट या जेनी कहा जाता है, और उनके बच्चे को कोल्ट कहते हैं।  एक जानवर जो पर्याय है मूर्खता का, जो मनुष्यों मे प्रचलित है एक अपशब्द अतार्थ गाली के रूप मे। “अबे गधा है क्या” बोलचाल की भाषा में, "गधा" शब्द का प्रयोग मूर्ख, बेवकूफ या जिद्दी व्यक्ति के लिए किया जाता है, और अक्सर इसे "बेवकूफ" के पर्यायवाची के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका प्रयोग अक्सर किसी ऐसे व्यक्ति का वर्णन करने के लिए किया जाता है जो मूर्खतापूर्ण या तर्कहीन तरीके से व्यवहार करता है। "गधे को बाप बनाना" मुहावरे का अर्थ है ज़रूरत पड़ने पर किसी मूर्ख या नीच व्यक्ति की भी खुशामद करना, चापलूसी करना, या झूठी तारीफ करना ताकि अपना काम निकल सके। यह मुहावरा भी गधे को उसके अड़ियल स्वभाव की वजह से ही मूर्ख प्राणी की श्रेणी मे गिनता है। सरल-सहज, मेहनती पर थोड़ा अड़ियल होना, क्या मूर्खता की निशानी है? यह एक सोचने का विषय है ।  गधा वास्तव मे क्या एक मूर्ख और ढीठ जानवर है? नहीं- गधा जैसा सोचा जा...

गाय की आत्मकथा | Autobiography of cow

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Photo by  Juliana Amorim  on  Unsplash मेरा यह लेख मेरे दिल के बहुत करीब पशु गाय के विषय मे हैं। हिन्दू धर्म मे गाय की महत्ता मात्र एक पशु नहीं अपितु एक ईश्वरीय स्वरूप की है, जो अपने दुग्ध से हमारा पौषण करती है। गाय को धेनु, कामधेनु आदि नामों से भी जाना जाता है ।  गाय की आत्मकथा एक मार्मिक विषय है। ३३ करोड़ देवी देवताओ को अपने अंदर समाहित करने वाली गाय आज अपने ही उद्धार के लिए तरसती प्रतीत होती है । समुन्द्र मंथन के समय देवीय रूप से अवतरित गाय जिसे वो सम्मान प्राप्त था जो एक देवी देवता को प्राप्त होता है, मानव के लोभवश आज जीवन का एक कटु सत्य झेल रही है। चलिए शुरू करते है- गाय की आत्मकथा - मैं गाय हूँ । मैं भारतवर्ष मे पाया जाने वाला एक देवीय पशु कहलाती हूँ । लोग मुझे गौ माँ व माता के रूप मे भी पूजते है। मैं एक दुधारू पशु हूँ ।  मेरा वर्तमान चाहे कठोर और विदारक है परंतु मेरा भूत बहुत ही वैभवशाली रहा है ।  मेरा वैभवशाली इतिहास  समुन्द्र मंथन से प्राप्त मैं कामधेनु कहलाई। मैं भी समुन्द्र से प्राप्त चौदह रत्नों मे से एक थी। ऋषियों द्वारा मेरा देवतुल्य सत्का...