गधा एक उपेक्षित प्राणी
गधा एक ऐसा पालतू जानवर जो इंसानों के साथ हजारों वर्षों से जुड़ा हुआ है। नर गधे को जैक कहा जाता जबकी मादा गधे को जेनेट या जेनी कहा जाता है, और उनके बच्चे को कोल्ट कहते हैं। एक जानवर जो पर्याय है मूर्खता का, जो मनुष्यों मे प्रचलित है एक अपशब्द अतार्थ गाली के रूप मे। “अबे गधा है क्या”
बोलचाल की भाषा में, "गधा" शब्द का प्रयोग मूर्ख, बेवकूफ या जिद्दी व्यक्ति के लिए किया जाता है, और अक्सर इसे "बेवकूफ" के पर्यायवाची के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका प्रयोग अक्सर किसी ऐसे व्यक्ति का वर्णन करने के लिए किया जाता है जो मूर्खतापूर्ण या तर्कहीन तरीके से व्यवहार करता है।
"गधे को बाप बनाना" मुहावरे का अर्थ है ज़रूरत पड़ने पर किसी मूर्ख या नीच व्यक्ति की भी खुशामद करना, चापलूसी करना, या झूठी तारीफ करना ताकि अपना काम निकल सके। यह मुहावरा भी गधे को उसके अड़ियल स्वभाव की वजह से ही मूर्ख प्राणी की श्रेणी मे गिनता है। सरल-सहज, मेहनती पर थोड़ा अड़ियल होना, क्या मूर्खता की निशानी है? यह एक सोचने का विषय है ।
गधा वास्तव मे क्या एक मूर्ख और ढीठ जानवर है? नहीं- गधा जैसा सोचा जाता है, उन सब से हटकर, एक बहुत ही समझदार, सीधा परंतु थोड़ा अड़ियल जानवर है। गधे अपनी बुद्धिमत्ता के संकेत अपनी स्मृति, समस्या-समाधान, अपने पर्यावरण से सीखने और नई चुनौतियों के अनुकूल ढलने जैसे संज्ञानात्मक गुणों के माध्यम से प्रदर्शित करते हैं।
गधे देखने में जिद्दी लग सकते हैं, लेकिन वास्तव में वे स्थिति का आकलन करने और अपने आस-पास के वातावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, समय लेने की अपनी सहज प्रवृत्ति के अनुसार ही प्रतिक्रिया करते हैं। यह दर्शाता है कि वे अपने कल्याण को प्राथमिकता देते हुए निर्णय लेते हैं, जो उनकी संज्ञानात्मक क्षमताओं का स्पष्ट संकेत है।
गधे अपनी याददाश्त के लिए भी जाने जाते हैं। वे स्थान, दिशाएँ, लोग, आदेश और घटनाएँ याद रख सकते हैं। यदि वे एक बार किसी रास्ते पर चल चुके हैं, तो वे उसे बाद में भी पहचान लेते हैं, जिससे उन्हें हर बार दिशा-निर्देश पूछे बिना ही स्थानों तक पहुँचने और घर लौटने में मदद मिलती है। इससे उन्हें भोजन और आश्रय खोजने में भी सहायता मिलती है। वे पिछले अनुभवों से सीखते हैं: यदि किसी स्थान पर कोई हानिकारक या अप्रिय घटना घटित होती है, तो वे बिना सोचे-समझे दोबारा उस स्थान पर नहीं जाते।
गधे अपनी अनुकूलन क्षमता के माध्यम से बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करते हैं, जिससे वे चुनौतीपूर्ण वातावरण में भी फल-फूल सकते हैं। उनके मजबूत पैर और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में भारी बोझ उठाने की क्षमता कठिन परिस्थितियों में भी उनकी कुशलता को उजागर करती है।
गधों में सूंघने की अद्भुत क्षमता होती है, जिससे वे 10 किलोमीटर दूर तक की गंध का पता लगा सकते हैं। यह प्राकृतिक क्षमता उन्हें शुष्क, विशाल भूभागों में पानी और भोजन का पता लगाने में मदद करती है - जो शुष्क क्षेत्रों में जीवित रहने के लिए एक महत्वपूर्ण कौशल है।
इतने अधिक गुणों से परिपूर्ण यह पशु मूर्ख और उपहास का पात्र समझा जाता है। पुराने समय मे किसी प्रकार के दंड के लिए इनका प्रयोग किया जाता था, जैसे- काला मुहँ करके गधे पर बिठाना, चप्पलों की माला पहनाकर गधे पर बैठाकर घुमाना आदि ।
गधे से हमें पता चलता है कि आप के अच्छे गुण भी आपकी तरक्की मे बाधक हो सकते है। इतना मेहनती और विभिन्न प्रकार के गुणों से भरपूर होने पर भी उसका एक अड़ियल स्वभाव उसे जड़ जीवों के वर्ग मे धकेल देता है और मानव के उपहास का कारण भी बनाता है।
बिल्लियों और कुत्तों की तरह, गधों का भी अपना एक विशेष दिवस होता है। 8 मई को मनाया जाने वाला विश्व गधा दिवस, गधों के कल्याण और इन जानवरों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का एक अवसर है।
किसी मनुष्य के मूर्खतापूर्ण कृत्य को गधे से तुलना करना वास्तव मे गधों का तरिस्कार करना मात्र है। काम-काम ढेर सारा काम, खाने को सुख चारा, चाबुकों से पिटाई आदि किसी भी प्राणी को मूर्खता की श्रेणी मे धकेल सकता है। परंतु आज सभी प्रकार की सुख-सुविधा से सुसज्जित लोग मूर्खतापूर्ण बयान देने, व्यवहार करने मे इस पशु से बहुत आगे है।



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