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ऐलीअन बनता मानव

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  ऐलीअन  ऐलीअन (Alien) से तात्पर्य बाह्य अंतरिक्ष से आया प्राणी से है । हमारी कल्पना ने उसे कई  रूप रंग दिए हैं, परंतु उसके अस्तित्व पर विभिन्न पक्षों के अपने-अपने तर्क है । कुछ उनके अस्तित्व को बिल्कुल नाकारते हैं , वहीं दूसरी और कुछ लोग उन्हें देखने का दावा करते हैं । पता नहीं सच्चाई क्या है, परंतु हमारा विषय इस से हटकर है।   मेरा यह लेख एक ऐसे विषय के बारे मे आप का ध्यान आकर्षित कराता है, जो हमारे बीच बहुत से  बाह्य प्राणियों का स्वरूप साकार कर रहा है । चलिए जानते है उस बारे मे -  आज के डिजिटल युग मे मनुष्य का स्वरूप कुछ इस तरह बदल रहा है, मानो प्रतीत होता है जैसे ऐलीअन हमारे बीच मे घूम रहे है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, मोबाईल धारक बड़े-बड़े हेड्फोन के साथ। मोबाईल के साथ बड़े-बड़े हेड्फोन पहने लोग ऐसे प्रतीत होते है जैसे कि ऐलीअन हमारे बीच ही घूम रहे हों। वास्तव मे देखा जाए तो यह बहुत हद तक ठीक भी है। आजकल अधिकतर  लोगों अपने मोबाईल मे ही व्यस्त रहते हैं । उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता आस-पास क्या हो रहा है, सभी लोगों अपने -अपने यंत्रों मे व्यस्त न...

रंग भरने वाली किताबों के विकासात्मक लाभों की जानकारी

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 रंग भरने वाली किताबों के विकासात्मक लाभों की जानकारी तेजी  से डिजिटल (Digital) होती दुनिया में, किताब में रंग भरने का सरल कार्य बच्चों के लिए विकासात्मक लाभों का खजाना प्रदान करता है। नन्हें  हाथों को व्यस्त रखने  के लिए सिर्फ एक शगल (Pass time) होने से कहीं ज़्यादा, रंग भरना एक शक्तिशाली उपकरण है, जो आवश्यक संज्ञात्मक, मोटर और भावनात्मक कौशल का पोषण करता है।  बढ़िया  मोटर नियंत्रण (मोटर कौशल शारीरिक क्षमताएं हैं जिनमें विशिष्ट गतिविधियों या कार्यों को करने के लिए मांसपेशियों का उपयोग करना शामिल है। ये चलने और बैठने जैसी बुनियादी क्रियाओं से लेकर लिखने या खेल खेलने जैसी अधिक जटिल गतिविधियों तक हो सकती हैं।)  को बढ़ाने से लेकर रचनात्मकता को बढ़ावा देने और भावनाओं के लिए एक स्वस्थ तरीका है। यह केवल एक कार्यविधि ही नहीं अपितु बच्चों, के सम्पूर्ण विकास की कुंजी है। चलिये जानते है -इसके कुछ और लाभ ।  आवश्यक कौशल को निखारना  मोटर कौशल का विकास  रंग भरने का सबसे महत्वपूर्ण लाभ ठीक मोटर कौशल के विकास में निहित है। क्रेयॉन (Crayon), पेंसिल (Pencil)...

मेरी प्यारी गुल्लक

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गुल्लक जो प्रतीक है धन संचय का, जो सिखाता है कैसे छोटे-छोटे प्रयास बड़ी खुशियों को जन्म देते है। मिट्टी से बना ऐसा पात्र जो हमे जीवन के कुछ अनोखे पाठ पढ़ाता है। कुम्हार के द्वारा चाक पर चढ़कर आग मे तपकर तैयार होता है यह अनोखा पात्र, जिसे आज विभिन्न प्रकार के आकार और रंगों से सजाकर तैयार किया जाता है। गुल्लक एक ऐसा बैंक जिसमे आप एक छिद्र के माध्यम से रुपए- पैसे तो जमा कर सकते है परंतु समय से पहले बिना तोड़े निकल नहीं सकते। परंतु कभी-कभी उत्सुकता वश कुछ प्रयास किया जाता था, गुल्लक को बिना तोड़कर उस जमा को निकालने का । परंतु अपने बड़ों द्वारा समझाने पर हम छोड़ देते थे उस जिद्द को । तो यह है, गुल्लक की कहानी ।  बचपन मे दीपावली के त्योहार पर उपहार के रूप मे दिलाया जाने वाला खिलौना है गुल्लक। खिलौने से अभिप्राय यह है कि किस तरह बच्चों को खेल-खेल मे धन संचय और धन की उपयोगिता का पाठ घर-घर मे सिखाया जाता है।  गुल्लक का प्रचलन केवल भारत मे ही नहीं अपितु अन्य देशों मे भी है –जहां इसे पिगी बैंक (Piggy Bank)  कहा जाता है।  जर्मनी और नीदरलैंड जैसे कुछ यूरोपीय देशों में, सुअर अच्छे भाग्य ...

कछुआ और दो सारस की कहानी और संदेश

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आज की  कहानी के शीर्षक से आपको ज्ञात हो गया होगा कि यह कहानी बचपन मे पढ़ी वही कहानी है , जो कि हम सभी ने कितनी बार पढ़ी और अपने बच्चों को सुनाई होगी। कहानी मे तीन जीवों को पात्रता दी गई है जो कहानी के संदेश को बहुत ही सफलता के साथ पढ़ने व सुनने वाले तक पहुँचाते है। तो चलिए बिना ज्यादा देर किए कहानी को शुरू करते हैं। एक समय एक छोटे से तालाब में एक कछुआ रहता था।   एक बार भयंकर गर्मी के कारण धीरे-धीरे तालाब का पानी सूखने लगा । कछुआ इस बात से परेशान रहता कि यदि तालाब पूरी तरह सूख गया तो मेरा क्या होगा। एक दिन , दो सारस तालाब के पास आए और कछुए ने उन दोनों सारस से उसे पास के तालाब में ले जाने के लिए कहा , जहां अधिक पानी है। सारस में से एक ने बताया , “ हम एक तालाब को जानते हैं जहाँ बहुत सारा पानी है। लेकिन , हम तुम्हें वहां कैसे ले जा सकते हैं”।   कछुए  ने उनसे कहा, “चिंता मत करो, मेरे पास एक युक्ति है। तुम दोनों अपनी चोंच में एक छड़ी पकड़ो और मैं उसे अपने मुँह से पकड़ूंगा। तब तुम दोनों उड़कर मुझे उस तालाब तक ले जा सकते हो।” सीख मुसीबत मे हमे अपनी सूझ-बूझ से काम लेना...

सफल जीवन की परिभाषा

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यह एक छोटी सी कहानी है -जिसमे एक बहुत ही बढ़िया सीख छुपी है ।  कहानी का स्वरूप थोड़ा छोटा जरूर है, परंतु इससे मिलने वाली सीख बहुत ही गहरी है । तो चलिए बिना विलंब कहानी को शुरू करते हैं -  एक बार एक बेटे ने अपने पिता से पूछा, "सफल जीवन क्या है?" उसके पिता ने कोई जवाब नहीं दिया और अपने बेटे को पतंग उड़ाने के लिए छत पर ले गए । पिता जी  पतंग उड़ा रहे थे और बेटा टकटकी लगा,  उन्हें बढ़े ध्यान से देख रहा था ।  कुछ देर बाद उत्सुकतापूर्वक  बेटे ने कहा, पापा इस धागे की वजह से हमारी  पतंग आगे तक नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें? बेटे ने  फिर कहा - "अगर हम धागा तोड़ दें,  तो ये पतंग और ऊपर जा सकती है।” बेटे के  दो बार कहने पर पिता ने अंततः  धागा तोड़ दिया । इसके बाद वे दोनों उस पतंग को देखने लगे। उन्होंने देखा कि पहले  पतंग थोड़ी ऊपर गई,  लेकिन उसके बाद वह फड़फड़ाती हुई नीचे आई और दूर किसी अनजान जगह पर जा गिरी। इसके बाद पिता ने अपने बेटे की ओर देखते हुए कहा, 'बेटा, जीवन में जब हम ऊंचाई पर होते हैं, सफलता प्राप्त करते हैं तो अ...

महाप्रभु जगन्नाथ की अद्भुत रथ यात्रा

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श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर भारतीय राज्य उड़ीसा के सबसे प्रभावशाली मंदिर में से एक है, जिसका निर्माण गंगा राजवंश के एक प्रसिद्ध राजा अनंत वर्मन चोडगंगा देव द्वारा 12वीं शताब्दी मे पुरी के समुद्र तट पर किया गया था। पुरी को प्राचीन काल से कई नामों से जाना जाता था जैसे- श्री क्षेत्र, शाक क्षेत्र, शंखक्षेत्र, पुरुषोत्तम क्षेत्र, नीलांचल,नीलगिरि और उत्कल  भी कहा जाता है।  इसके अलावा जगन्नाथ पुरी मंदिर को ‘यमनिका तीर्थ’ भी कहा जाता है, जहाँ हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ की उपस्थिति के कारण मृत्यु के देवता ‘यम’ की शक्ति समाप्त हो गई थी ।  इस मंदिर को "सफेद पैगोडा" भी कहा जाता था और यह चारधाम तीर्थयात्रा (बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी, रामेश्वरम) का एक हिस्सा है। मंदिर की बनावट और वास्तुशिल्प  श्री जगन्नाथ भगवान का मुख्य मंदिर कलिंग वास्तुकला में निर्मित एक प्रभावशाली और अद्भुत संरचना है, जिसकी ऊँचाई 65 मीटर है। मंदिर की बाहरी दीवार के पूर्वी, दक्षिणी, पश्चिमी और उत्तरी मध्य बिंदुओं पर चार द्वार हैं, जिन्हें "सिंहद्वार (शेर का द्वार), अश्व द्वार (घोड़े का द्वार), व्याघ्र द्वा...